Friday, January 22, 2010

ये ज़माना / This world

ये ज़माना तो है तरक्की पसंदों का दुश्मन
राह मन की चलो, लोग जलते हैं जलने दो

गिरतों को गिरना है लोगों की पुरानी आदत
पर बात तो तब है की गिरतों को संभलने दो

नफरत की मशाले लिए कुछ लोग घूमते हैं
कर लो कैद इनको घर से बाहर न निकलने दो

अमन के चराग देखो, दोस्तों हरगिज़ न बुझने पायें
रुख हवाओं का मोड़ दो, इन चरागों को जलने दो

दर्द तुम कब तक सहोगे? पीछे कब तक रहोगे ?
हिम्मत करो खुद को बाहर दायरों से निकलने दो

2 comments:

deepti said...

नफरत की मशाले लिए कुछ लोग घूमते हैं
कर लो कैद इनको घर से बाहर न निकलने दो

ye do laine bahut acchi hai agar har aadmi ye baat yaad rakhe to shayad bahut kuch behtar ho jayega...ghazal acchi hai ..alfazo ka acche se badha hai tumne

Sonu said...

नफरत की मशाले लिए कुछ लोग घूमते हैं
कर लो कैद इनको घर से बाहर न निकलने दो

ye do laine bahut acchi hai agar har aadmi ye baat yaad rakhe to shayad bahut kuch behtar ho jayega...ghazal acchi hai ..alfazo ka acche se badha hai tumne



Thanks

sahi kaha